🥗भाग 46🥗
🥗🥗🥗अकरकरा:-

संस्क्रत – अकरकरं,करहाट
हिंदी – अकरकरा,करकरा
गुजराती – अकलकरो
मराठी, तेलगु, कन्नड़- अकलकरा
तमिल- अकरकरम
🥗यह वातकफनाशक,नाड़ी बल्य ,कटुपौष्टिक है।
🥗फेफड़ों के लिए हानिकारक है। अर्थात जिन्हें फेफड़ों से संबंधित रोग है वो इसका प्रयोग न करें।
🥗उपयोग:-
🥗दांत दर्द के लिए दांत के नीचे रखने से दर्द तुरंत रूकता है। सुन्न करने का इसमें बहुत अच्छा गुण है।
🥗जब सिंदूर खाने से जहर हो जाता है तो इसका सेवन करने से जहर उतर जाता है।
🥗मिर्गी – जड़ का चूर्ण शहद से दें, मिर्गी ठीक कर देता है
🥗जीभ का स्वाद गायब करना :-
जिन रोगियों को दवा खाने में कड़वी लगती है , इसका थोड़ा सा जड़ का टुकड़ा मुंह से चबाने से तुरंत मुंह का स्वाद गायब हो जाता है और आसानी से दवा खाई जा सकती है।
नोट : – आयुर्वेदिक औषधि लेने से पहले वैधानिक चेतावनी : –
स्वदेशी और अच्छी गुणवत्ता वाली औषधियों का प्रयोग करें। यदि कोई साइड इफेक्ट या समस्या हो, तो तुरंत अपने निकट के वैद्य जी से संपर्क करें। अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें एवं वैध जी की सलाह का पालन करें। आयुर्वेदिक चिकित्सा का पालन करते समय मन में पूर्ण विश्वास बनाए रखें कि आप विशेष रूप से आपके लिए निर्दिष्ट औषधियों और खाद्य पदार्थों का सेवन कर रहे हैं जैसे कि आपके वैद्य ने सुझाया है।
स्रोत : –
🥗 ब्रह्मचर्य औषधि समाधान 🥗
जानकारी को संकलित किया गया : –
🌷राकेश कुमार चंद्रवंशी (चन्द्रा जी)🌷 द्वारा
ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य की मंगलकामना करते हैं।
– : । आपका दिन शुभ हो । : –
– : धन्यवाद : –