🥗भाग 47🥗
🥗🥗🥗अपमार्ग या चिरचिटा:-

🥗यह पौधा पेट की लटकती चर्बी, सड़े हुए दाँत, गठिया, आस्थमा, बवासीर, मोटापा, गंजापन, किडनी आदि 20 रोगों के लिए किसी वरदान है
🥗अपामार्ग तीखा, कडुवा तथा प्रकृति में गर्म होता हैई, यह पाचनशक्तिवर्द्धक, दस्तावर (दस्त लाने वाला), रुचिकारक, दर्द-निवारक, विष, कृमि व पथरी नाशक, रक्तशोधक (खून को साफ करने वाला), बुखारनाशक, श्वास रोग नाशक, भूख को नियंत्रित करने वाला होता है तथा सुखपूर्वक प्रसव हेतु एवं गर्भधारण में उपयोगी है।
🥗फ़ायदे:-
🥗 गठिया रोग :-
इसके पत्ते को पीसकर, गर्म करके गठिया में बांधने से दर्द व सूजन दूर होती है।
🥗 पित्त की पथरी :-
पित्त की पथरी में चिरचिटा की जड़ आधा से 10 ग्राम कालीमिर्च के साथ या जड़ का काढ़ा कालीमिर्च के साथ 15 ग्राम से 50 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम खाने से पूरा लाभ होता है। काढ़ा अगर गर्म-गर्म ही खायें तो लाभ होगा।
🥗 यकृत का बढ़ना :-
अपामार्ग का क्षार मठ्ठे के साथ एक चुटकी की मात्रा से बच्चे को देने से बच्चे की यकृत रोग के मिट जाते हैं।
🥗लकवा :-
एक ग्राम कालीमिर्च के साथ चिरचिटा की जड़ को दूध में पीसकर नाक में टपकाने से लकवा या पक्षाघात ठीक हो जाता है।
🥗 पेट का बढ़ा होना या लटकना :-
चिरचिटा (अपामार्ग) की जड़ 5 ग्राम से लेकर 10 ग्राम या जड़ का काढ़ा 15 ग्राम से 50 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम कालीमिर्च के साथ खाना खाने से पहले पीने से आमाशय का ढीलापन में कमी आकर पेट का आकार कम हो जाता है।
🥗बवासीर :-
अपामार्ग की 6 पत्तियां, कालीमिर्च 5 पीस को जल के साथ पीस छानकर सुबह-शाम सेवन करने से बवासीर में लाभ हो जाता है और उसमें बहने वाला रक्त रुक जाता है। खूनी बवासीर पर अपामार्ग की 10 से 20 ग्राम जड़ को चावल के पानी के साथ पीस-छानकर 2 चम्मच शहद मिलाकर पिलाना गुणकारी हैं।
पत्तियों को 5 क़ी संख्या में लेकर इसे काली मिर्च के पांच टुकड़ों के साथ पानी में पीसकर सुबह-शाम लेने से पाइल्स (अर्श ) में लाभ मिलता है और इस कारण निकलने वाला खून भी बंद हो जाता है I
🥗मोटापा :-
अधिक भोजन करने के कारण जिनका वजन बढ़ रहा हो, उन्हें भूख कम करने के लिए अपामार्ग के बीजों को चावलों के समान भात या खीर बनाकर नियमित सेवन करना चाहिए। इसके प्रयोग से शरीर की चर्बी धीरे-धीरे घटने भी लगेगी।
🥗कमजोरी :-
अपामार्ग के बीजों को भूनकर इसमें बराबर की मात्रा में मिश्री मिलाकर पीस लें। 1 कप दूध के साथ 2 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित सेवन करने से शरीर में पुष्टता आती है।
🥗सिर में दर्द :-
अपामार्ग की जड़ को पानी में घिसकर बनाए लेप को मस्तक पर लगाने से सिर दर्द दूर होता है।, बीज का चूर्ण सूंघे
🥗दांत दर्द:-
इसका रस रुई के साथ लगाए तुंरन्त आराम मिलता है
🥗 संतान प्राप्ति :-
अपामार्ग की जड़ के चूर्ण को एक चम्मच की मात्रा में दूध के साथ मासिक-स्राव के बाद नियमित रूप से 21 दिन तक सेवन करने से गर्मधारण होता है। दूसरे प्रयोग के रूप में ताजे पत्तों के 2 चम्मच रस को 1 कप दूध के साथ मासिक-स्राव के बाद नियमित सेवन से भी गर्भ स्थिति की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
🥗मलेरिया :-
अपामार्ग के पत्ते और कालीमिर्च बराबर की मात्रा में लेकर पीस लें, फिर इसमें थोड़ा-सा गुड़ मिलाकर मटर के दानों के बराबर की गोलियां तैयार कर लें। जब मलेरिया फैल रहा हो, उन दिनों एक-एक गोली सुबह-शाम भोजन के बाद नियमित रूप से सेवन करने से इस ज्वर का शरीर पर आक्रमण नहीं होगा। इन गोलियों का दो-चार दिन सेवन पर्याप्त होता है।
🥗जोड़ो की सूजन:-
जोड़ों की सूजन में इसके ताजे पत्तों को पीसकर लेप करने मात्र से सूजन घटने लग जाती है I
🥗किसी मा का बच्चा गर्भ में फस गया हो, अपामार्ग की जड़ पीसकर नाभि के नीचे गुप्तनाग के पास लेप कर दो बच्चा बाहर आ जाएगा, उसकेबाद तुरन्त लेप हटाओ वरना गर्भशाय बाहर आ जायेगा।।।
🥗🥗🥗विशेष:-
🥗गर्भवती एव स्तनपान कराने कराने वाली माँ इसका प्रयोग न करे
नोट : – आयुर्वेदिक औषधि लेने से पहले वैधानिक चेतावनी : –
स्वदेशी और अच्छी गुणवत्ता वाली औषधियों का प्रयोग करें। यदि कोई साइड इफेक्ट या समस्या हो, तो तुरंत अपने निकट के वैद्य जी से संपर्क करें। अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें एवं वैध जी की सलाह का पालन करें। आयुर्वेदिक चिकित्सा का पालन करते समय मन में पूर्ण विश्वास बनाए रखें कि आप विशेष रूप से आपके लिए निर्दिष्ट औषधियों और खाद्य पदार्थों का सेवन कर रहे हैं जैसे कि आपके वैद्य ने सुझाया है।
स्रोत : –
🥗 ब्रह्मचर्य औषधि समाधान 🥗
जानकारी को संकलित किया गया : –
🌷राकेश कुमार चंद्रवंशी (चन्द्रा जी)🌷 द्वारा
ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य की मंगलकामना करते हैं।
– : । आपका दिन शुभ हो । : –
– : धन्यवाद : –