🥗भाग 36🥗
🥗🥗🥗टॉन्सिल्स:-

🥗टॉन्सिल्स क्या है??????
यह बादाम के आकार के ऐसे अंग हैं, जो हमारे मुंह के अंदर गले के दोनों तरफ होते हैं। टॉन्सिल्स हमारे शरीर के सिक्युरिटी गार्ड के रूप में काम करते हैं और बाहरी इन्फेक्शन से हमारी हिफाजत करते हैं। ये बाहर से आने वाली किसी भी बीमारी को हमारे शरीर में दाखिल होने से रोकते हैं। अगर हमारे टॉन्सिल मजबूत होंगे तो वे बीमारी को शरीर में जाने से तो रोकेंगे ही, साथ ही खुद भी उस बीमारी या इन्फेक्शन से बच जाएंगे। अगर टॉन्सिल्स कमजोर होंगे तो वे बीमारी को शरीर में जाने से तो रोक लेंगे लेकिन खुद बीमार हो जाएंगे यानी उनमें सूजन आ जाएंगी, वे लाल हो जाएंगे, उनमें दर्द होगा जिससे बुखार हो जाएगा। इसके अलावा कुछ भी खाने-पीने या निगलने में दिक्कत होगी।
🥗कितनी तरह का होता है टॉन्सिलाइटिस
1) बैक्टीरियल इन्फेक्शन
2) वायरल इन्फेक्शन
🥗बैक्टीरियल इन्फेक्शन :-
यह इन्फेक्शन बैक्टीरिया के अटैक से होता है, जिनमें प्रमुख हैं Staphylococcus aureus,U Streptococcus pyogenes, Haemophilus influenzae आदि।
🥗वायरल इन्फेक्शन :-
यह इन्फेक्शन Reovirus, Adenovirus, Influenza virus आदि के अटैक से होता है। यह इन्फेक्शन तब होता है, जब हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता यानी बीमारियों से लड़ने की ताकत कम होती है।
🥗टॉन्सिल कैसे होता है :-
– बहुत तेज गर्म खाना खाने से
– बहुत ज्यादा ठंडा खाने या पीने से, जैसे एकदम ठंडी आइसक्रीम या कोल्ड ड्रिंक आदि
– ज्यादा मिर्च-मसाले वाला तीखा और तला-भुना खाना खाने से
– टॉन्सिल्स के कमजोर होने पर भी
– प्रदूषण, धूल-मिट्टी आदि से
– इम्यून सिस्टम (बीमारियों से लड़ने की क्षमता) कमजोर होने पर
– पेट खराब होने से गैस या कब्ज की लगातार शिकायत रहने पर
🥗लक्षण :-
– टॉन्सिल्स का बढ़ना और सूज जाना
– गले के बाहर भी सूजन
– सूजन के साथ-साथ गले में दर्द
– कुछ भी खाने-पीने और निगलने में दिक्कत
– टॉन्सिल्स और गले का लाल होना
– तेज बुखार होना
– थकान होना
– कान में दर्द
– आवाज में बदलाव और भारीपन आना
🥗घरेलू इलाज :-
🥗उपाय 1:-
– 5 पत्ते तुलसी, 5 पत्ते काली मिर्च, 2 ग्राम या चने के बराबर अदरक को 1 कप पानी में उबालें। फिर छानकर पानी को पी लें, महीने भर पिएं। रात को पीकर सोएं और इसे पीने के बाद कुछ खाएं-पिएं नहीं।
🥗उपाय 2:-
शहद , तुलसी के 5पत्तों का रस ,पान के पत्ते का रस , अदरक का रस मिलाकर दिन में दो तीन बार चाटें ।
🥗उपाय 3:-
आधा चमच्च हल्दी लेकर सीधे गले के अंदर डाल दे, यह 5-10 मिनट में स्वयं लार के साथ घुलकर अंदर चली जायेगी, 7 दिन में 2 बार दोहारए, आवश्यकता पड़ने पर तीसरी बार प्रयोग करें
🥗उपाय 4:-देशी गाय का मूत्र से कुल्ला या गरारे करें
🥗उपाय 1 या 2 में से कोई एक उपाय करें, उपाय 3 साथ मे जरूर करे, उपाय 3 और 4 दोनो एक ही है।
नोट:- आयुर्वेदिक औषधि लेने से पहले वैधानिक चेतावनी:-
स्वदेशी और अच्छी गुणवत्ता वाली औषधियों का प्रयोग करें। बिना वैद्य की सलाह के कोई भी औषधि न लें, और यदि कोई साइड इफेक्ट या अनुपात में समस्या हो, तो तुरंत अपने पास के वैद्य से संपर्क करें। स्वास्थ्य और उनकी सलाह का पालन करें। आयुर्वेदिक चिकित्सा का पालन करते समय आश्वासन बनाए रखें कि आप विशेष रूप से आपके लिए निर्दिष्ट औषधियों और खाद्य पदार्थों का सेवन कर रहे हैं जैसे कि आपके वैद्य ने सुझाया है।
स्रोत : –
🥗 ब्रह्मचर्य औषधि समाधान 🥗
जानकारी को संकलित किया गया : –
🌷राकेश कुमार चंद्रवंशी (चन्द्रा जी)🌷 द्वारा
ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य की मंगलकामना करते हैं।
-:।आपका दिन शुभ हो।:-
-:धन्यवाद:-