🥗भाग 74🥗
🥗🥗🥗आयुर्वेद के पाँच चमत्कारी चूर्ण:-

🥗ये बाजार में उपलब्ध है घर पर बनाये तो सबसे अच्छा है
🥗पंचसकार चूर्ण:-
-सौंठ 50 ग्राम
-सौंफ 50 ग्राम
-सनाय 50 ग्राम
-छोट़ी हरड़ 50 ग्राम
-सेंधा नमक 30 ग्राम
सबको कूटकर चूर्ण बना लें ।
मात्रा -3-6 ग्राम तक रात को सोने से पहले जल से।
🥗उपयोग – यह चूरण सोम्य विरेचक है। कब्ज , आमवृद्धि , सिरदर्द, अजीर्ण , उदरवात , अफारा , उदरशूल , गुदाशूल आदि दोषों को दूर कर पाचन क्रिया सुधारता है।
पंचसकार चूर्ण अर्शरोग , आमप्रकोप , जीर्ण आमवात में संधि स्थानों की पीड़ा , मलावरोध तथा नये अम्लपित्त के रोगियों के लिए अमृत है।
🥗प्रदरांतक चूर्ण:-
-चिकनी सुपारी 20 ग्राम
-माजुफल 20 ग्राम
-चौलाई जड़ 20 ग्राम
-धाय के फूल 20 ग्राम
-स्वर्ण गैरिक 20 ग्राम
-मोचरस 20 ग्राम
-पठानी लोध 20 ग्राम
-राल 20 ग्राम
सबको बारीक चूर्ण कर लें फिर सबके बराबर मिश्री डाल लें, स्वर्ण गैरिक बहुत सस्ती है। इसको गेरू , गैरिक भी कहते है। लाल रंग में होती है।
मात्रा – 5-10 ग्राम तक । चावलों के धावन से दिन में दो- तीन बार ले
🥗उपयोग – यह चूर्ण गर्भाशय आदि प्रजनन संस्थान पर शामक प्रभाव डालता है | इसके सेवन से श्वेत और रक्त प्रदर दूर होते है तथा गर्भाशय और बीजाशय सुदृढ़ होते है ।
विशेष – गर्भाशय में शोथ होने से यदि प्रदर के स्राव से मुर्दे जैसी दुर्गन्ध आती है तब इस चूरण का उपयोग नही करना चाहिए |
🥗रज: प्रवर्तक चूर्ण:-
-भारंगी 80 ग्राम
-काली मिर्च 80 ग्राम
-पीपल 80 ग्राम
-सौठ 80 ग्राम
-भुनी हींग 30 ग्राम
सबको कूटपीसकर चूर्ण करें ।
मात्रा – 2-3 ग्राम ब्राह्मी 10 ग्राम , काले तिल 50 ग्राम के क्वाथ के साथ दें । माशिक धर्म आने के समय से 5 दिन पहले दें ।
🥗उपयोग – इसके उपयोग से माशिक धर्म बिना कष्ट बिना दर्द आने लगता है, इस चूर्ण का सेवन 15-35 वर्ष तक की आयु वाली स्रियों को ही करना चाहिए ।
पेट में कब्ज न रहने दें।
🥗वीर्य शोधन चूर्ण:-
-बबूल की बिना बीज वाली कच्ची फली 25 ग्राम
-बबूल की कोपल 25 ग्राम
-बबूल गोंद 25 ग्राम
सबको समभाग लेकर चूर्ण करें ।
मात्रा – 4-6 ग्राम तक मिश्री मिलाकर लें । ऊपर से दूध पिएं ।
🥗उपयोग – वीर्य सोधन चूर्ण के सेवन से वीर्य का पतलापन , शुक्रमेह , धातु दोष दूर होकर वीर्य गाढ़ा होता है |
🥗मूत्र विरेचक चूर्ण:-
-शीतलचीनी 10 ग्राम
-रेवन्दचीनी 10 ग्राम
-छोटी एलायची बीज 10 ग्राम
-जीरा 10 ग्राम
-कलमी शोरा 20 ग्राम ,
-मिश्री 40 ग्राम ।
सबको छानकर चूर्ण कर लें ।
मात्रा – 3 ग्राम दवा दूध + जल की लस्सी के साथ । दिन में 3-4 बार लें।
🥗उपयोग – यह चूर्ण मुत्रोत्पति बढ़ाता है । सुजाक में पूव दूर करने में और मूत्र साफ लाने में बहुत उपयोगी है । भोजन में केवल दूध भात खाना चाहिए ।
🥗त्रिकुट चूर्ण:-
-काली मिर्च 25 ग्राम
-सोंठ 25 ग्राम
-पीपर 25 ग्राम
सभी को मिलाकर चूर्ण बना ले
गुनगुने पानी या शहद के साथ ले
🥗उपयोग- खांसी, कफ ,टॉन्सिल, भूख न लगना, कब्ज, थाइराइड, सूखा रोग, आदि में लाभ करता है
बढ़े हुए पित्त जलन एसिडिटी मुंह मे छाले आदि में प्रयोग न करे
🥗त्रिफला:-
-हरड़ 50 ग्राम
-बहेड़ा 100 ग्राम
-आवंला 150 ग्राम
सभी को पीसकर चूर्ण बना लें,
किसी भी रोग में अद्भुत है
सुबह शहद या गुड़ के साथ एव रात्रि में दूध या पानी के साथ सेवन करे
नोट : – आयुर्वेदिक औषधि लेने से पहले वैधानिक चेतावनी : –
स्वदेशी और अच्छी गुणवत्ता वाली औषधियों का प्रयोग करें। यदि कोई साइड इफेक्ट या समस्या हो, तो तुरंत अपने निकट के वैद्य जी से संपर्क करें। अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें एवं वैध जी की सलाह का पालन करें। आयुर्वेदिक चिकित्सा का पालन करते समय मन में पूर्ण विश्वास बनाए रखें कि आप विशेष रूप से आपके लिए निर्दिष्ट औषधियों और खाद्य पदार्थों का सेवन कर रहे हैं जैसे कि आपके वैद्य ने सुझाया है।
स्रोत : –
🥗 ब्रह्मचर्य औषधि समाधान 🥗
जानकारी को संकलित किया गया : –
🌷राकेश कुमार चंद्रवंशी (चन्द्रा जी)🌷 द्वारा
ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य की मंगलकामना करते हैं।
– : । आपका दिन शुभ हो । : –
– : धन्यवाद : –