13 प्रकार के वेगों को कभी नही रोकना चाहिए

🥗भाग 24🥗

🥗🥗🥗13 प्रकार के वेगों को कभी नही रोकना चाहिए:-

🥗अपान वायु-
मल और मूत्र दोनो रुक जाते है, गैंस से पेट फूल ज़ाता है, बड़ी आंक मे संक्रमण, मल का आँतों में रूकना और थकान सीं महसुस होने लगती है, रक्तचाप बढ़ता है और पेट मे बादी से दर्द होने लगता है ,तथा वायु विकार होने लगता है।

🥗मल-
ऐसा करने से गैस की समस्या, पेट में दर्द की शिकायत होती है. पेट साफ नहीं होता. मस्तिष्क में दर्द रहता है. शुगर और हार्ट की समस्या बढ़ती है, धीरे-धीरे पूरे शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता है

🥗मूत्र-
ऐसा करने से मूत्र की थैली में संक्रमण होने का खतरा रहता है. लिंग इंद्रियों में दर्द होता है. मस्तिष्क में दर्द की शिकायत रहती है.पथरी और ह्यड्रोसील कि समस्या होती है मूत्र रुक-रुककर आता है. और आंखों की रोशनी भी कम होने लगती है

🥗छींक-
इसके वेग को रोकने से गर्दन के पिछे की मन्या नामंक नस जकड़ जातीं है ,सिर मे शूल से चलतें है आधा मूँह टेड़ा हो जाता है ,और अर्धांग वात रोग हो जाता है ,चरक सहिंता मे लिखा है गर्दन का जकड़ना, मस्तक शूल, लकवा, आंधा सीसी इन्द्रियोँ कि दुर्लभता होती है।

🥗प्यास-
प्यास को रोकने से शरीर में कफ प्रबल हो जाता है। इसके वेग को रोकने से कंठ और मुँह सूखते है, कानोँ मे कम सुनाइ देता है, क़ब्ज़ होती है, मधुमेह का रोग और हृदय मे पीड़ा होती है।

🥗भूख-
इसके वेग को रोकने से तन्द्रा, शरीर टूटना, अरुचि थकान और नजर कम होना और शरीर मे दुर्लभता आना आदि।।

🥗निद्रा-
नींद के वेग को रोकने से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति कम होती है. और चिड़चिड़ापन आता है.आखों के रोग आते है

🥗वमन –
इसके वेग को रोकने से यानि आती हुईं क़य को रोकने से खुजली, चकते, अरुचि, मुँह पर झांई सूजन ,पीलिया ,सुखी ओकारी आदि उपद्रव होते है ,इन रोगों को दुर करने के लिये भोजन के बाद वमन कारणि चाहीये

🥗सांस लेना-
जागते समय सीने से सांस ले एव सोते समय पेट से सांस ले

🥗जम्हाई-
इसके वेग को रोकने से गर्दन के पिछे की नस और गले का जकड़ जाना, मस्तक मे विकार होना, नेत्र रोग, मुख रोग और कान के रोग का होना का ख़तरा होता है

🥗आंसू आना-
इसको रोकने से मस्तिष्क मे भारीपन रहना, नेत्र दोष, जुकाम, ह्रदय रोग, अरुची आदि के रोग की संभावना बढ़ जाती है.

🥗डकार लेना-
ढकार हमारी पाचन तन्त्र की ख़तरे की घण्टी दो हमें चेतावनी देता भोजन हम जल्दी जल्दी खा रहे या ज़रूरत और क्षमता से ज्यादा खा रहे। इसके वेग को रोकने से बादी के रोग होते है, कंठ और मुँह का भारी सा मालूम होंना, हिचकी खॉंसी, अरुचि, हृदय तथा छाती का बन्धा स महसुस करना, ढकार को रोकने से गैस से संबधित बीमारी होती है

🥗वीर्य वेग-
वीर्य के वेग को रोकने से प्रोस्टेट के कैंसर होने का खतरा रहता है. मूत्राशय में सूजन, गुर्दे में पीड़ा, पेशाब का कष्ट से होना, शुक्र की पथरी और वीर्य के रिसने जैसे अनेक रोग होने की संभावना होती है.

नोट:- आयुर्वेदिक औषधि लेने से पहले वैधानिक चेतावनी:-

स्वदेशी और अच्छी गुणवत्ता वाली औषधियों का प्रयोग करें। बिना वैद्य की सलाह के कोई भी औषधि न लें, और यदि कोई साइड इफेक्ट या अनुपात में समस्या हो, तो तुरंत अपने पास के वैद्य से संपर्क करें। स्वास्थ्य और उनकी सलाह का पालन करें। आयुर्वेदिक चिकित्सा का पालन करते समय आश्वासन बनाए रखें कि आप विशेष रूप से आपके लिए निर्दिष्ट औषधियों और खाद्य पदार्थों का सेवन कर रहे हैं जैसे कि आपके वैद्य ने सुझाया है।

स्रोत : –
🥗 ब्रह्मचर्य औषधि समाधान 🥗

जानकारी को संकलित किया गया : –
🌷राकेश कुमार चंद्रवंशी (चन्द्रा जी)🌷 द्वारा
ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य की मंगलकामना करते हैं।
-:।आपका दिन शुभ हो।:-
-:धन्यवाद:-

Social Share

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *