तुलसी

🥗भाग 65🥗

🥗🥗🥗तुलसी :-

🥗तुलसी के प्रकार हैं – श्याम तुलसी, राम तुलसी, श्वेत/विष्णु तुलसी, वन तुलसी, नींबू तुलसी, इन सभी मे सबसे अधिक औषधीय गुण श्याम तुलसी में है, जिसके पत्ते हल्के काले रंग के है

🥗कुल 27 प्रकार की तुलसी हैं

🥗तुलसी के रस से पेट के कीड़े, उल्टी, हिचकी, भूख अच्छी लगना, लीवर की कार्यशक्ति बढ़ाना, ब्लड कोलेस्ट्रॉल कम करना, पेट की गैस , दस्त, कोलाइटिस, कमर दर्द, जुकाम, सिरदर्द, बच्चों के रोग, हृदय रोग आदि सभी बिमारियों में लाभ होता है।

🥗तुलसी अर्क ब्लड कॉलेस्ट्रोल, एसिडिटी, पेचिस, कोलाइटिस, स्नायु दर्द, सर्दी-जुकाम, सिरदर्द, उल्टी-दस्त, कफ, चेहरे की क्रांति में निखार, मुंहासे, सफेद दाग, कुष्ठ रोग, मोटापा कम, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, मलेरिया, खांसी, दाद, खुजली, गठिया, दमा, मरोड़, आंख का दर्द, पथरी, नकसीर, फेफड़ों की सूजन, अल्सर, पायरिया, शुगर, मूत्र संबंधी रोग आदि रोगों मे है

🥗बारिश के मौसम में, जब सर्दी, बुखार और डेंगू जैसी बीमारियों के संक्रमण फैलते हैं, इसकी पत्तियों का काढ़ा नियमित रूप से पीना शरीर को इन संक्रमणों से बचाता है।

🥗किसी भी बुखार को तोड़ने की ताकत तुलसी में है जो पेरासिटामोल के जहर से कई गुना ताकतवर है

🥗बुखार अधिक होने की स्थिति में मरीज़ को तुलसी की पत्तियों को दालचीनी के पाउडर के साथ आधा लीटर पानी में उबालना चाहिए और उसमें गुड़ और थोड़ा दूध मिलाकर मरीज को पिलाना चाहिए। इससे बुखार की तेजी से कम हो जाता है।

🥗बुखार के उपचार के लिए एक ग्राम तुलसी की पत्तियों को थोड़े अदरक के साथ आधा लीटर पानी में इतना उबालना चाहिए कि पानी की मात्रा घटकर आधी रह जाए तब इस काढ़े को चाय की तरह पीना चाहिए।

🥗तुलसी की पत्तियाँ कफ से होने वाली गले की खराबी को ठीक करने में भी लाभदायक होती हैं।

🥗तुलसी की पत्तियों को पानी में उबालकर इस पानी को पीने और उससे गरारे करने से गला ठीक हो जाता है

🥗सिरदर्द होने पर तुलसी का रस और कपूर मिलाकर लगाए जल्दी ही सिरदर्द से मुक्ति मिलेगी

🥗खाँसी, जुकाम के लिए 10 पत्ते तुलसी के तथा 4 लौंग लेकर एक गिलास पानी में उबालें। जब पानी आधा शेष बचे, तब थोड़ा-सा सेंधा नमक डालकर गर्म चाय की तरह पी जायें। यह काढ़ा पीकर कुछ समय के लिए वस्त्र ओढ़कर पसीना लें।

🥗अगर आप कम नींद आने यानि अनिंद्रा से पीड़ित है तो तुलसी के पत्ते और अजवायन किसी कपड़े में रखकर पोटली बनाकर अपने तकिये के नीचे रखकर सोयें

🥗तुलसी का रस या तेल की एक दो बूंदे नाक से सूंघने से मस्तिष्क में तरावट आती है

🥗तुलसी के पत्ते पानी में मिलाने से पानी की अशुद्धि दूर होती है

🥗मस्तिष्क की तरावट के लिए गर्मी के मौसम में हर रोज आधा चम्मच काली मिर्च का चूर्ण, 1 चम्मच शुद्ध देशी घी तथा एक चम्मच शक्कर का चूरा इन तीनों को मिलाकर सुबह के समय लेने से मस्तिष्क में तरावट आ जाती है, याददाश्त तेज हो जाती है। बाल काले होते हैं और आँखों की रौशनी तेज हो जाती हैं

🥗श्यामा तुलसी के पत्तों का दो-दो बूंद रस आंखों में डालने से आँखों का पीलापन , लाली और रतौंधी ठीक हो जाती है इसके अलावा तुलसी के पत्तों का रस काजल की तरह आंख में लगाने से आखो के रोग जिसमे आंखे चिपचिपी हो जाती है ठीक हो जाता है

🥗तुलसी के 25 पत्ते, 10 काली मिर्च मोटी पीसी हुई 200 मि.ली पानी में डालकर इतना उबालें कि 150 मी.ली ही पानी बच जाये। इसे ठण्डा कर छान कर एक बोतल में भर लें। इसकी तीन-तीन चम्मच रोजाना तीन बार पियें। खाँसी ठीक हो जायेगी। पुरानी खाँसी जो किसी भी तरह ठीक नहीं होती, वह भी ठीक हो जायेगी।

🥗तुलसी की पत्तियों के एक चम्मच रस में एक चम्मच नीबू का रस मिलायें तथा इसे एग्जीमा तथा खाज-खुजली के स्थान पर लगायें,ये भी ठीक हो जाएगा

🥗तुलसी का रस, अदरक का रस एक-एक चम्मच थोड़ी सी काली मिर्च और आधा चम्मच सेंधा नमक लेकर पानी के साथ लें इससे गैस बदहजमी दोनों ही दूर हो जायेंगे

🥗30 तुलसी की साफ पत्तियाँ पीसकर 20 ग्राम दही जो खट्टा न हो या एक-दो चम्मच शहद के साथ सेवन करें। इसके पश्चात् दो घंटे तक आगे-पीछे कुछ न खायें-पियें, यह शक्तिवर्धरक है

🥗सोते समय 5 ग्राम तुलसी के बीज गर्म दूध के साथ लेने से शारीरिक कमजोरी दूर होती है

🥗महिलाओं के पीरियड्स में अनियमितता और पीरियड्स के दर्द को दूर करने में भी तुलसी के बहुत लाभ है इसके लिए तुलसी के पत्तो को गर्म पानी में उबालकर एक चम्मच शहद दिन में तीन बार लें इससे शरीर का इम्म्युन भी मजबूत होगा | सिर्फ तुलसी के पत्तों के सेवन से या तुलसी के दस बीज पानी में उबालकर पीने से भी मासिक चक्र नियमित किया जा सकता है

🥗सांस की बदबू को दूर करने में भी तुलसी के पत्ते काफी फायदेमंद होते हैं और नेचुरल होने की वजह से इसका कोई साइडइफेक्ट भी नहीं होता है

🥗कहीं चोट लग गई हो तो तुलसी के पत्ते को फिटकरी के साथ मिलाकर लगाने से घाव जल्दी भर जाता है क्योंकि तुलसी में एंटी-बैक्टीरियल तत्व होते हैं जो घाव को पकने नहीं देता है

नोट : – आयुर्वेदिक औषधि लेने से पहले वैधानिक चेतावनी : –

स्वदेशी और अच्छी गुणवत्ता वाली औषधियों का प्रयोग करें। यदि कोई साइड इफेक्ट या समस्या हो, तो तुरंत अपने निकट के वैद्य जी से संपर्क करें। अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें एवं वैध जी की सलाह का पालन करें। आयुर्वेदिक चिकित्सा का पालन करते समय मन में पूर्ण विश्वास बनाए रखें कि आप विशेष रूप से आपके लिए निर्दिष्ट औषधियों और खाद्य पदार्थों का सेवन कर रहे हैं जैसे कि आपके वैद्य ने सुझाया है।

स्रोत : –
🥗 ब्रह्मचर्य औषधि समाधान 🥗

जानकारी को संकलित किया गया : –
🌷राकेश कुमार चंद्रवंशी (चन्द्रा जी)🌷 द्वारा
ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य की मंगलकामना करते हैं।
– : । आपका दिन शुभ हो । : –
– : धन्यवाद : –

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