कान के रोग

🥗भाग 38🥗

🥗🥗🥗कान के रोग:-

🥗कान से मवाद आना, कान के पर्दे में छेद होना, कान में आवाज आना, कम सुनाई देना,कान में फोड़े फुंसी आदि

🥗उपाय 1-
सफेद पुनर्नवा जड़ी-
पुनर्नवा के दो कोमल पत्तों को अच्छी तरह धोकर उसका रस सिलबट्टे पर रगड़ कर निकाल लें, पानी नही डालना है दर्द वाले कान में 5-6बूंद टपका दें , दर्द कुछ ही देर में बंद हो जाएगा। दुबारा कभी दर्द नही होगा ।

🥗उपाय 2-
एलोवेरा-
कान बहना, कान में छेद होना, कान में आवाज आना, आदि में एलोवेरा के पत्ते को बीच से काटकर उसका 5-6 बूँद रस कान में रोज डालें, 2-3 माह में कान का पर्दा ठीक हो जाएगा

🥗उपाय 3-
देशी गाय का गौमूत्र-
कान में आवाज आना, मवाद आना, कम सुनाई देना,कान में फोड़े फुंसी आदि समस्या में रोज 2-2 बूँद कान में डाले 3 माह तक

🥗कान में पीब(मवाद) होने पर-

🥗पहला प्रयोगः-
फुलाये हुए सुहागे को पीसकर कान में डालकर ऊपर से नींबू के रस की बूँद डालने से मवाद निकलना बंद होता है।

🥗दूसरा प्रयोगः-
शुद्ध सरसों या तिल के तेल में लहसुन की कलियों को पकाकर 1-2 बूँद सुबह-शाम कान में डालने से फायदा होता है

🥗बहरापन:- उपाय 1

🥗पहला प्रयोग:-
दशमूल, अखरोट अथवा कड़वी बादाम के तेल की बूँदें कान में डालने से बहरेपन में लाभ होता है।

🥗दूसरा प्रयोगः-
ताजे गोमूत्र में एक चुटकी सेंधा नमक मिलाकर हर रोज कान में डालने से आठ दिनों में ही बहरेपन में फायदा होता है।

🥗तीसरा प्रयोगः-
आकड़े के पके हुए पीले पत्ते को साफ करके उस पर सरसों का तेल लगाकर गर्म करके उसका रस निकालकर दो-तीन बूँद हररोज सुबह-शाम कान में डालने से बहरेपन में फायदा होता है।

🥗चौथा प्रयोगः-
करेले के बीज और उतना ही काला जीरा मिलाकर पानी में पीसकर उसका रस दो-तीन बूँद दिन में दो बार कान में डालने से बहरेपन में फायदा होता है।

🥗पाँचवाँ प्रयोगः-
कम सुनाई देता हो तो कान में पंचगुण तेल की 3-3 बूँद दिन में तीन बार डालें। औषधि में सारिवादि वटी 2-2 गोली सुबह, दोपहर तथा रात को लें। कब्ज न रहने दें। भोजन में दही, केला, फल व मिठाई न लें।

🥗कान का दर्दः-

🥗अदरक का रस कान में डालने से कान के दर्द, बहरेपन एवं कान के बंद होने पर लाभ होता है।

🥗प्याज का रस गुनगुना कर कान में डालने से दर्द ठीक होता है

🥗कान में आवाज होने परः-
लहसुन एवं हल्दी को एकरस करके कान में डालने पर लाभ होता है। कान बंद होने पर भी यह प्रयोग हितकारक है।

🥗कान में कीड़े जाने परः-
दीपक के नीचे का जमा हुआ तेल अथवा शहद या अरण्डी का तेल या प्याज का रस कान में डालने पर कीड़े निकल जाते हैं।

🥗कान के सामान्य रोगः-
सरसों या तिल के तेल में तुलसी के पत्ते डालकर धीमी आँच पर रखें। पत्ते जल जाने पर उतारकर छान लें। इस तेल की दो-चार बूँदें कान में डालने से सभी प्रकार के कान-दर्द में लाभ होता है।

🥗बहरापन की चिकित्सा:- उपाय 2

अनार के पत्तों का रस 1 लीटर
बिल्व के पत्तों का रस 1 लीटर
गाय का घी 1 लीटर

🥗बनाने की विधि:- तीनों को एक साथ मिलाकर मिट्टी के बर्तन में डालकर हल्की आंच पर रखें . जब रस जल जाएं , केवल घी ही रह जाए, बर्तन नीचे उतारकर ठंडा होने पर घी संभालकर रख लें .

🥗लेने का तरीका :- एक से दो तोला घी हाजमें अनुसार गाय के एक पाव दूध से मिश्री मिलाकर पीने से कानों का बहरापन दूर होता है . यह प्रयोग मुझे किसी प्राचीन ग्रंथ में पढ़ने को मिला।।

🥗बहरापन दूर करने का तैल:- उपाय 3

शहद
अदरख का रस
सहिजन की जड़ की छाल का रस
केले की जड़ का रस
तिल का तेल

प्रत्येक बराबर मात्रा में मिलाकर पकावें । तैलमात्र शेष रहने पर उतार कर छान कर रख लें ।

🥗गुण और उपयोग-
कान में ज्यादा मैल जम जाने अथवा कान के छेद किसी कारण बन्द हो जाने अथवा सुनने की शक्ति कम हो जाने या सुनाई कम देने पर यह तैल बहुत उपयोगी है । कान की हर तरह की बिमारी में रामबाण की तरह कार्य करता है । रोगियों को बहुत लाभकारी सिद्ध होता है । यह तैल आप घर पर ही बनाये।

नोट:- आयुर्वेदिक औषधि लेने से पहले वैधानिक चेतावनी:-

स्वदेशी और अच्छी गुणवत्ता वाली औषधियों का प्रयोग करें। बिना वैद्य की सलाह के कोई भी औषधि न लें, और यदि कोई साइड इफेक्ट या अनुपात में समस्या हो, तो तुरंत अपने पास के वैद्य से संपर्क करें। स्वास्थ्य और उनकी सलाह का पालन करें। आयुर्वेदिक चिकित्सा का पालन करते समय आश्वासन बनाए रखें कि आप विशेष रूप से आपके लिए निर्दिष्ट औषधियों और खाद्य पदार्थों का सेवन कर रहे हैं जैसे कि आपके वैद्य ने सुझाया है।

स्रोत : –
🥗 ब्रह्मचर्य औषधि समाधान 🥗

जानकारी को संकलित किया गया : –
🌷राकेश कुमार चंद्रवंशी (चन्द्रा जी)🌷 द्वारा
ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य की मंगलकामना करते हैं।
-:।आपका दिन शुभ हो।:-
-:धन्यवाद:-

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